“इच्छा”

इच्छा ही प्रेम है जब तक हमारे मन में धधकती हुई इच्छा नहीं होगी तब तक हमें उसे पूरी शिद्दत से महसूस करना होगा , जैसे खिलाड़ी खेलना चाहता है ,कोई पेंटर पेंटिंग बनाना चाहता है, उसे हमें

तहेदिल से बनाना होगा क्योंकि इच्छा प्रेम की ही एक भावना है यदि हम किसी खेल ,अभिनय, गायन, वादन, शौक़ या अपने। काम-काज में बेहतर बनना चाहते हैं या ड्राइविंग करना चाहते। है तो हमें अपनी उसी शिद्दत से इच्छाओं को मज़बूत बना कर आगे आना होगा तभी हमारी इच्छा शक्ति की पूर्ति होगी,

Desire is love until we have a burning desire, then we have to feel it with full vigor, like a player wants to play, a painter wants to make a painting, he has to give us

Will have to be made wholeheartedly because desire is only a feeling of love if we are playing, acting, singing, playing, hobby or ourselves. Want to get better at work or driving. If we have to strengthen our desires with the same strength, then only our will power will be fulfilled,

(c)Mithlesh Singhal

“आनन्द”

यदि हम अपने जीवन से प्रेम करने लगते हैं तो हमारी हर सीमा ग़ायब हो जाती है तो हमारे अन्दर आनन्द और सम्बंधों से भरीं मौजूद ख़ुशी की सारी सीमाएँ टूट जाती है कहीं कोई प्रतिरोध नहीं रह जाता है हम जिससे प्रेम करते हैं वह लगभग तत्काल ही प्रकट हो जाता हैं जब लोगों को हमारी मौजूदगी का एहसास होने लगता हैं, तो हमारे जीवन में अवसरों की बरसात होने लगती है, हम अपने आप में इतना बेहतर महसूस करने लगते हैं कि जितना कभी सोचा नहीं होता है हम बेहद हल्कापन महसूस करने लगते हैं मानो आकाश मैं उड़ रहे हो और हमारा आनन्द हमेशा हमारे साथ ही रहता है ।

If we start loving our life, then every boundary of ours disappears, then all the boundaries of happiness present in us are filled with joy and relationships, there is no resistance left. When people start to realize our presence, it starts raining opportunities in our lives, we start feeling so much better in ourselves Not that much is never thought we would start feeling extremely lightness as if the sky I fly and joy always be with us.

(क) मिथलेशसिगल

“विश्वास”

जो विश्वास हमें दिखाई नहीं देता उसके साथ हम अनुग्रह या समर्पण कैसे कर सकते है ? लेकिन

जो विश्वास घास के तिनके से भी पतला है और बरगद के पेड़ की जड़ों से भी ज़्यादा

मज़बूत है उसी विश्वास के कारण न तो कोई अपेक्षा रखते हैं ,और न ही हम कुछ माँगते हैं

अगर कोई गहरा संकट हमारे ऊपर आ भी जाए तो भी यह विश्वास हमें अडिग अंचल व

मज़बूत रखता है,

How can we surrender grace with faith that we do not see?

Faith is thinner than the straw of the grass and more than the roots of the banyan tree

Due to the same faith, neither expect nor demand anything.

Even if a deep crisis comes upon us, this belief will still haunt us.

Keeps strong,

(क) मिथलेशसिगल

“प्रेम”

जब जब हमारा मन कुछ अच्छा सा महसूस करने लगता है तब हम अपनी

प्रेम की शक्ति या मन की शक्ति से जुड़ जाते है , क्योंकि प्रेम समस्त

अच्छी भावनाओं का स्रोत है , प्रेम से ही उत्साह, रोमांच और जोश की

भावनाएँ उत्पन्न होती है, जब हम इस तरह की भावनाएँ निरंतर महसूस करते हैं तो

हमारे अन्दर एक अदभूतशक्ति को महसूस करने लगते है, वह शक्ति ही प्रेम है

When our mind starts feeling good, then we

Attach to the power of love or the power of the mind, because love is all

The source of good feelings is love, excitement and passion

Feelings arise when we feel these kinds of emotions constantly

We feel an amazing power in us, that power is love

“भावना”

हमारे पास जीवन की हर चीज को महसूस करने के लिए देखने, सुनने ,

स्वाद लेने व स्पर्श करने की “एहसास” करने की इंद्रियाँ है,इन्हीं के द्वारा हम

सुनते है ,स्वाद लेते है,देखते हैं गंध लेते हैं,स्पर्श करते हैं दिन भर में हमारे मन में

बहुत से विचार आते हैं उनमें से ज़्यादातर निरर्थक व निष्फल होते हैं, क्योंकि

उनकी वजह से हमारे भीतर कोई प्रबल भावना उत्पन्न नहीं होती इसलिए हमारी भावना

ही सबसे महत्वपूर्ण है,

To feel everything in life we have to see, hear, We have senses to “feel” to taste and to touch, through these we Hear, taste, see, smell, touch in our mind throughout the day Many ideas come, most of them are fruitless Because of them there is no strong feeling in us, so our feeling Is the most important

( क) मिथलेश सिगल

“उत्साह”

जब भी कभी हमारे दिल में या मन में अच्छी भावनाएँ आती है , तो हम अपने प्रेम की

शक्ति से जुड़ जाते हैं क्योंकि प्रेम ही समस्त अच्छी भावनाओं का स्त्रोत है

प्रेम से ही उत्साह, उमंग, जोश , रोमांस, की भावनाएँ उत्पन्न होती है

यदि ये भावनाएँ हम निरंतर महसूस करते हैं तो हमारा जीवन उत्साहपूर्ण होता है

Whenever there are good feelings in our heart or in our mind, Connected with power because love is the source of all good feelings Feelings of excitement, excitement, passion, romance arise from love itself If these feelings we feel constantly, then our life is excited

(क) मिथलेश सिंघल

“समय”

जब भी कभी ख़ाली समय या अपने आप मैं होतीं हूँ तो

मैं एक-एक करके अपनीं प्रिय चीजों के बारे में सोचती हूँ

जैसे अपने परिवार व परिवार के सदस्यों के बारे में, मित्र अपने- पराये ,

घर, स्थितियों, घटनाएँ , सप्ताह, महीने, वर्षों में हुई मेरी मनचाही

या अनचाही चीजें जिनकी सूची मेरे दिल – दिमाग़ में बनती जाती थी,

मैं अपने मनोदशाओं और भावनाएँ के मामले में सतर्क रही व सतर्क हूँ,

क्योंकि हमारी भावनाएँ हमारा शरीर , समय, शब्दों से अटूट सम्बन्ध रखता है,

समय ही हमारा जीवन है,

Whenever I have free time or on my own I think of my favorite things one by one Like about his family and family members, friends are his friends, Home, situations, events, weeks, months, years Or unwanted things, which used to be listed in my mind, I have been alert and cautious about my moods and feelings, Because our emotions are inextricably related to our body, time, words, Time is our life

(क)मिथ्लेश सिंघल

“ मुश्किलें”

नहीं ठहरती है मुश्किलें ज़िंदगी भर ज़िंदगी मैं ,

हर मुश्किल का एक सुनहरा अंत होता है,

क्या हुआ जो ख़ुशियों की पतझड़ है अभी,

पतझड़ के मौसम के बाद ही बसंत होता है,

दौड़ कर ख़ुशियाँ भी आएगी मेरे जिवन मैं ,

कुछ और नहीं बस मैं ख़ुद पर ही पूरा यक़ीन कर लू,

आज अंधेरा हुआ है ज़िंदगी मैं तो कल रोशनी की किरण भी आएगी।

Difficulties don’t last all my life,

Every difficulty has a golden end,

What happened that is the fall of happiness right now,

Spring happens only after the fall season,

I will also be happy after running

Nothing else, I believe in myself only,

It is dark today, I will have a ray of light tomorrow,

(क) मिथलेश सिंगल ,

“मंज़िल”

कामयाबी के सफ़र मैं मुश्किलें तो आती ही है,

परेशानिया दिखाकर हमको डराती भी है,

चलते ही रहना है क़दम रुकने न पाये,

अरे मंज़िल तो मंज़िल ही है,

एक दिन तो आएगी ही ,

There are difficulties in traveling for success,

He scares us by showing problems,

Keep walking, do not stop the steps,

Oh, the destination is the destination,

One day will come,

(क)। मिथलेश सिंगल

“मुक़ाम”

छोड़ने वाले छोड ही जाते है , चाहे मुक़ाम कोई भी हो,

निभाने वाले फिर भी निभाते है , हालात चाहे जैसे भी हो,

Those who leave are left, no matter where they are,

Those who follow still play, whatever the circumstances,

(क) मिथलेश सिंगल